भारत में आईवीएफ से पहले चमत्कारी बच्चे का जन्म
नई दिल्ली, July 21, 2015 /PRNewswire/ --
संतान पाने की आशा ने आखिरकार आईवीएफ साइकल की बार-बार हो रही असफलताओं पर विजय प्राप्त किया। 15 से ज़्यादा आईवीएफ साइकल की विफलता के बाद, श्रीमति भाटिया को डर था कि वह गर्भधारण नहीं कर पाएंगी। लेकिन आशावादिता की विजय हुई और उन्होंने पहले भारतीय चमत्कारी बच्चे को जन्म दिया, 15 आईवीएफ साइकल के विफल होने के बाद उन्होंने गर्भधारण किया था। वैज्ञानिक रूप से देखें तो विशेषज्ञों का कहना है कि 10 बार आईबीएफ साइकल के विफल होने के बाद गर्भधारण करना लगभग असंभव सा है, लेकिन यहाँ 15 बार आईवीएफ साइकल असफल होने के बाद इस चमत्कारिक बच्चे का जन्म हुआ है। ऐसा भारत के चिकित्सा के इतिहास में पहली बार
हुआ है।
श्रीमति भाटिया इस बच्चे का पालन-पोषण कर रही हैं और यह अब लगभग एक वर्ष का हो चुका है एवं सामान्य तथा स्वस्थ है, वह स्वीकार करती हैं कि बार-बार आईवीएफ की असफलता के बाद वह माँ बनने की आशा पूरी तरह खो चुकी थीं। निराशा के उस समय में के सभी भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने के बाद, अब श्रीमति भाटिया उस दर्द को याद तक नहीं करना चाहतीं, क्योंकि इन सभी विसंगतियों के बावजूद, गॉडियम आईवीएफ सेंटर में उनका माँ बनने का सपना साकार हो गया।
सिर्फ दुख पहुँचाने वाले इन 15 आईवीएफ साइकल पर श्री और श्रीमति भाटिया को कई लाख रुपये और जीवन के 500 दिन खर्च करने पड़े। ट्यूब बंद होने के साथ ही पीसीओडी की समस्या के कारण उन्हें 15 वर्षों तक संतानहीनता का दर्द झेलना पड़ा। इस दंपत्ति ने 15 वर्षों तक प्राकृतिक रूप से एवं दवाओं द्वारा इलाज से गर्भधारण की कोशिशें की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। श्री और श्रीमति भाटिया नई दिल्ली के गॉडियम आईवीएफ सेंटर जाने से पहले भारत से विदेशों तक के एक आईवीएफ सेंटर से दूसरे में चक्कर लगाते रहे।
गॉडियम आईवीएफ सेंटर के अत्यंत कुशल विशेषज्ञों ने इस केस का विस्तृत विश्लेषण किया और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि यह रिकरेंट इम्प्लांटेशन फेल्यर (आरआईएफ) का केस है। यह पाया गया कि अच्छे भ्रूण आईवीएफ साइकल में इम्प्लांट नहीं हो पा रहे थे। आरआईएफ के साथ ही, यह केस माँ के मौजूदा स्वास्थ्य समस्या के कारण भी और अधिक जटिल हो गया था, क्योंकि वह मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से पीड़ित थीं। प्रसिद्ध आईवीएफ विशेषज्ञ और गॉडियम आईवीएफ, आईवीएफ क्लीनिक चेन्स इंडिया की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने आरआईएफ कारकों एवं रोगी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए संतुलित प्रोटोकॉल के साथ उनका केस हाथ में लिया और इस बार आईवीएफ साइकल सफल रहा।
जिन रोगियों के साथ अनरिसेप्टिव एंडोमेट्रियम की समस्या हो, उनके लिए गॉडमियम आईवीएफ सेंटर में नवीनतम तकनीकों की मदद से कस्टमाइज्ड आईवीएफ प्रोटोकॉल तैयार किए गए थे। विशिष्ट इलाज तथा आईवीएफ थेरेपी की मदद से आईवीएफ साइकल सफल हुआ और श्रीमति भाटिया ने गर्भधारण किया। उनका बच्चा अब एक वर्ष का हो चुका है।
यह चिकित्सा के इतिहास का ऐसा पहला मामला है, जिसने भारतीय प्रेस को प्रत्येक रोगी के मामले में आईवीएफ के इलाज का विश्लेषण और कस्टमाइज्ड तथा वैज्ञानिक तरीके से इलाज करने के औचित्य पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञ प्रत्येक रोगी के लिए एक सामान्य आईवीएफ इलाज की तुलना में रोगी की निजी आवश्यकतानुसार हर एक के लिए अलग-अलग तरह के चिकित्सा प्रोटोकॉल तैयार करने की आवश्यकता बताते रहे हैं। सामान्य प्रोटोकॉल से न केवल आईवीएफ साइकल की असफलता का खतरा रहता है, बल्कि इससे संतान चाहने वाले दंपत्तियों के अवसादग्रस्त और निराश हो जाने की भी संभावना रहती है।
डॉ. मनिका खन्ना, गॉडियम आईवीएफ इंडिया
अवार्ड हासिल कर चुकी इन्फर्टिलिटी विशेषज्ञ और लैप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. मनिका खन्ना ने पूरे भारत एवं पूरी दुनिया के निःसंतान दंपत्तियों को संतान पाने हेतु उत्कृष्ट इलाज प्रदान करने के उद्देश्य से गॉडियम आईवीएफ चेन शुरु किया। भारत की सबसे कम उम्र की इन्फर्टिलिटी और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मनिका खन्ना को 6500 से ज़्यादा सफल आईवीएफ इलाज का श्रेय जाता है। इस क्षेत्र में अपने असाधारण कार्यकुशलता के लिए उन्हें कई अवार्ड और सम्मान हासिल हो चुके हैं।
एमबीबीएस, एमडी, डी.ए.जी.ई (जर्मनी) की डिग्रियाँ रखने वाली डॉ. खन्ना ने अपना एमबीबीएस और पीजी मेडिकल कॉलेज बड़ौदा से किया। उन्होंने वर्ष 2002 से वर्ष 2009 तक श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में सीनियर कंसल्टेंट के रूप में काम किया। इसके अलावा, डॉ. मनिका को दिल्ली रत्न अवार्ड (2008) (उन्हें भारत की राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा पाटिल ने दिल्ली रत्न 2008 के पदक से सम्मानित किया) और अमेरिकन सोसायटी ऑफ रिप्रोडक्टिव मेडिसीन के लाइफटाइम मेम्बर के अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। एक प्रसिद्ध आईवीएफ विशेषज्ञ होने के साथ ही, डॉ. खन्ना बहुत ही परोपकारी स्वभाव की महिला हैं, जो ज़रूरतमंद गरीब लोगों के लिए कई सहायता कार्यक्रम में भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।
गॉडियम आईवीएफ इंडिया के विषय में
गॉडियम आईवीएफ दुनिया का एक प्रमुख आईवीएफ क्लीनिक चेन है, जहाँ हम मानक और नैतिक और पारदर्शितापूर्ण तरीके से इलाज करते हैं। यह इस दशक का सबसे सफल आईवीएफ चेन है, जिसके नाम सबसे ज़्यादा सफल आईवीएफ के रिकॉर्ड दर्ज हैं। हम पर भरोसा कर यहाँ आने वाले हर 10 में से 9 दंपत्तियों को वास्तव में अच्छी सफलता मिली है।
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मार्केटिंग और स्ट्रेटजी हेड
गॉडियम आईवीएफ
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