TERI और GGGI ने जलवायु सहनशील समावेशी हरित वृद्धि और धारणीय विकास पर रिपोर्ट जारी की
नई दिल्ली, February 4, 2016 /PRNewswire/ --
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आकलन ने समावेशी हरित वृद्धि के लिए आवश्यक जलवायु सहनशील हस्तक्षेपों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की
मुख्य विशेषताएं:
- राष्ट्रीय स्तर पर, ऊर्जा क्षेत्र में हरित वृद्धि के प्रयास 2031 तक 117 लाख रोजगार सृजित कर सकते हैं।
- पंजाब की कृषि के मामले में, तापमान में अनुमानित वृद्धि के परिणामस्वरूप फसलों में वाष्पोत्सर्जन 6 - 8% तक बढ़ने का अनुमान है जिससे सिंचाई की ज़रूरतें बढ़ जाएंगी। फसल विविधीकरण न किए जाने की स्थिति में 2030 तक सिंचाई में 14.4 बिलियन घन मीटर (BCM) की कमी होगी। पंजाब में, 1971-2000 के सापेक्ष 2021-2050 की अवधि में वार्षिक माध्य तापमान 1.2 - 1.4 डिग्री C बढ़ जाने का अनुमान है।
- जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन 2030 तक 4% घट सकता है। इसके अलावा, 2030 तक इस राज्य में 11.61% विनाशकारी मृदा अपरदन होगा। हिमाचल प्रदेश में कुल तापमान में वृद्धि होगी, जिसके तहत 1971-2000 के सापेक्ष 2021-2050 की अवधि में वार्षिक अधिकतम माध्य तापमान 1.1 - 1.9 डिग्री C बढ़ जाने का अनुमान है।
- इस अध्ययन में पहली बार समग्र एकीकृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है जिसमें जलवायु मॉडलिंग, मृदा और जल का मूल्यांकन, ऊर्जा मॉडलिंग तथा क्षेत्रीय केस अध्ययन शामिल हैं। पहली बार इन दो राज्यों से 25 X 25 किमी रिजोल्यूशन पर जलवायु संबंधी आंकड़े तैयार किए गए हैं।
The Energy and Resources Institute (TERI) ने Global Green Growth Institute (GGGI) के साथ मिलकर हरित वृद्धि विकास पर एक अध्ययन पूरा किया है जो राष्ट्रीय स्तर पर तथा विशेषकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियां और सुझाव उपलब्ध कराता है, और इन्हें हरित वृद्धि और धारणीय विकास की ओर प्रेरित करना इस अध्ययन का उद्देश्य है।
TERI के एक शोधकर्ता से बात करते हुए माननीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, भारत सरकार, Shri Prakash Javadekar (पूरा विवरण देखने के लिए यहां क्लिक करें) ने यह पुष्टि की कि निर्धनता उन्मूलन के उद्देश्य केवल जलवायु सहनशील समावेशी हरित वृद्धि और धारणीय विकास द्वारा ही पूरे किए जा सकते हैं।
पेरिस जलवायु समझौते के आधार पर आगामी कार्रवाई की दिशा में भारत के बढ़ने के साथ, इस परियोजना से राष्ट्रीय व राज्य स्तर के नीति निर्माताओं को नवीन विश्लेषण, सूचना और सिफारिशें उपलब्ध कराने की आशा है जो नीतियां व कार्यक्रम डिज़ाइन व क्रियान्वित करने में सहायक होंगे, जिनमें धारणीय विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए Intended Nationally Determined Contribution (INDCs) भी शामिल है। विश्व आज जिन कई कठिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनको देखते हुए जलवायु तथा विकास कार्यों के प्रभावों के बारे में ज्ञान की आवश्यकता है ताकि वर्तमान और भावी निर्णयकर्ता जलवायु परिवर्तन और धारणीय विकास के जटिल हस्तक्षेपों को ठीक से समझते हुए उनमें अपनी अपेक्षित भूमिकाएं निभा सकें। 'भारत में हरित वृद्धि और विकास संबंधी प्रयास' वाली यह परियोजना, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत आठ मिशनों में से एक 'जलवायु परिवर्तन के बारे में रणनीतिक ज्ञान के मिशन' के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है।
गहन विश्लेषण के ज़रिए साक्ष्य विकसित करना इस परियोजना का उद्देश्य है ताकि राष्ट्रीय और उपराष्ट्रीय स्तरों पर नीतिगत विकल्प चुनने तथा हरित वृद्धि के अवसरों को समझने में मदद मिल सके। यह दो साल की अवधि वाली परियोजना, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में अपेक्षित जलवायु सहनशील हरित वृद्धि के प्रयासों, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, धारणीय ऊर्जा और समावेशी विकास को समझने में सहायक है। इसके अलावा, विशिष्ट सेक्टरों जैसे कि उद्योग, वायु प्रदूषण, कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन, भवन, और जलवायु परिवर्तन आदि के बारे में नीतिगत पृष्ठभूमि विवरण भारत में धारणीयता की दीर्घकालीन चुनौतियों की समीक्षा प्रस्तुत करने के साथ इनके समाधान के लिए नीतिगत कार्रवाईयों और हस्तक्षेपों के सुझाव भी पेश करते हैं। इन्हें इस वेबलिंक: http://www.teriin.org/projects/green पर देखा जा सकता है।
यह अध्ययन, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा सामना की जाने वाली विशिष्ट चुनौतियों की पड़ताल करता है जहां विकास गतिविधियां काफी हद तक इन राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। हिमाचल प्रदेश में विकास परिणामों तथा हरित हस्तक्षेपों के बीच संबंध समझने के लिए इस परियोजना में तीन मॉडलों (जलवायु, मृदा और जल मूल्यांकन, तथा ऊर्जा विश्लेषण) का प्रयोग किया गया है।
TERI के विषय में:
The Energy and Resources Institute ऊर्जा, पर्यावरण तथा धारणीय विकास पर केंद्रित एक स्वतंत्र, अलाभकारी अनुसंधान संस्थान है जो प्राकृतिक संसाधनों के दक्ष तथा धारणीय उपयोग के प्रति समर्पित है। 1974 में अपनी स्थापना के बाद से TERI अपने नवीनतापरक शोध के लिए उत्कृष्ट संस्थान के रूप में उभरा है और ऐसा विश्वस्तरीय संस्थान बन गया है जिसे राजनीतिक नेताओं, नीति निर्माताओं, कॉर्पोरेट संस्थाओं के साथ-साथ व्यापक नागरिक समाज का भी समर्थन प्राप्त है।
GGGI के विषय में:
The Global Green Growth Institute (GGGI) विकासशील देशों तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में प्रबल, समावेशी और धारणीय आर्थिक वृद्धि को समर्थित व प्रोत्साहित करने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। 2012 में रियो +20 संयुक्त राष्ट्र धारणीय विकास सम्मेलन में स्थापित GGGI के इस समय 25 सदस्य देश हैं और Prof. Dr. Susilo Bambang Yudhoyono - इंडोनेशिया गणतंत्र के छठवें राष्ट्रपति-(2004-2014) GGGI की महासभा के अध्यक्ष हैं। Mr. Yvo De Boer, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) के भूतपूर्व महासचिव GGGI के महानिदेशक हैं। सियोल, कोरिया में स्थित मुख्यालय के साथ GGGI दो पूरक और एकीकृत कार्यविधियों के माध्यम से हितधारकों का सहयोग करता है-हरित वृद्धि नियोजन और क्रियान्वयन तथा ज्ञान समाधान-जो राष्ट्रीय आर्थिक विकास योजनाओं में हरित वृद्धि के विकास, वित्तपोषण, तथा मुख्यधारा में लाने में सहायता के लिए डिज़ाइन किए गए समग्र उत्पाद व सेवाएं उपलब्ध कराता है।
भारत में GGGI: हरित वृद्धि और धारणीय विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत में विशेषकर उपराष्ट्रीय स्तर पर GGGI 2013 से कार्य कर रहा है। राज्य सरकारों, एजेंसियों, संस्थानों तथा क्षेत्रीय संगठनों से निकट संबंध बनाकर कार्य करते हुए GGGI ने तीन राज्य स्तरीय हरित वृद्धि कार्यनीतियां विकसित की हैं और एकीकृत समाधानों को चिन्हित करते हुए प्राथमिकता दी है जो विकास संबंधी कई तरह के फायदे प्रदान करते हैं, और क्रियान्वयन हेतु सहयोग प्रदान करता है। 2016 से शुरू GGGI India कार्यक्रम काफी हद तक राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रित हुआ है और भारत के INDC लागू करने में विशेष रूप से सहयोग दे रहा है।
मीडिया संपर्क:
The Energy and Resources Institute (TERI)
Pallavi Singh
+91-9873191597
[email protected]
Zainab Naeem
+91-8800286575
[email protected]
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