Poonam - Shilpi's Voice & Visuals और Epicreel की ओर से एक सामाजिक लघु फिल्म (सोशल शार्ट) की पेशकश
बंगलौर, भारत, 8 दिसम्बर, 2020 /PRNewswire/ -- बुजुर्गों की देखभाल के बारे में ज्यादातर बड़ी-बड़ी बातें ही कही जाती है। बुजुर्गों की देखभाल के आंकड़ों और रिसर्च को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि रहन-सहन की दशाओं, शारीरिक स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों के बजाय उनकी खुशियां सर्वाधिक मायने रखती हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने और एकाकी परिवार बनने के कारण उनका अकेलापन, उन्हें ऐसी उपेक्षा का शिकार बनाता है। इसके अलावा, किसी भी अन्य बीमारी की तरह अकेलापन भी एक बीमारी ही है। Poonam की सोच बुजुर्गों की दुर्दशा को जानने-समझने के लिए प्रेरित करती है।
आँकड़े
अगले 2 से 3 वर्षों में बुजुर्गों की संख्या 12% हो जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। और बारीकी से देखें तो, 68% बुजुर्ग गांवों में रहते हैं, जिनमें से 73% अशिक्षित और 40% गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं। इससे भी चिंताजनक बात ये है कि उनमें से 90% के पास कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है (बीमा, भविष्यनिधि, ग्रेच्युटी, पेंशन, या ऐसी ही कोई अन्य स्कीम), और वे आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर हैं। इसलिए यह ताज्जुब की बात नहीं कि ज्यादातर बुजुर्गों को अपना पेट पालने के लिए काम करना पड़ता है।
देश में स्वास्थ्यसेवाओं पर और बारीकी से विचार करें तो- 73% बुजुर्ग धूम्रपान, दिल के रोगों या कैंसर के कारण मर जाते हैं। अस्पताल में बेडों में उनका हिस्सा 30%, डॉक्टरों की विजिटों में 20%, और बिस्तर से लगे रोगियों में 50% रहता है। तो, जहां 12% जनसंख्या का इतना बोझ बढ़ेगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्यसेवाओं का अभाव किसी से छिपा नहीं है, तो सिस्टम निश्चित रूप से चरमरा जाएगा, और समस्या दिनोंदिन गंभीर ही होती जाएगी।
सरकार की भूमिका
भारत सरकार ने 2007 में अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों का 'भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम विधेयक पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि, बुजुर्ग अभिभावकों या वरिष्ठ नागरिकों का बच्चों या संबंधियों द्वारा भरण-पोषण अनिवार्य है, ऐसा न करने और उन्हें बेसहारा छोड़ देने व उनसे दुर्व्यवहार करने पर दंड देने का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत आज तक कोई मिसाल बनने वाली खबर नहीं आई है, इसलिए हर कोई यह अंदाजा लगा सकता है कि यह सारी व्यवस्था केवल कागज़ी ही है।
इसके बाद, 2011 में 'बुजुर्गों की स्वास्थ्यसेवा के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम' बनाते समय स्वास्थ्यसेवा तंत्र में सभी स्तरों पर बुजुर्गों के लिए वृद्धिकारक, उपचार, रोकथाम और पुनर्वास संबंध इलाज हेतु सुलभ पहुंच सुनिश्चित की गई। 'वरिष्ठ नागरिकों हेतु राष्ट्रीय नीति' द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि बुजुर्गों को देश की संपत्ति मानते हुए उनके साथ उचित व्यवहार किया जाए।
इस नीति में, बुजुर्गों के लिए आय उपार्जन वाली गतिविधियों के अलावा पेंशन और बीमा योजनाओं के मााध्यम से विशेष आर्थिक सहायता की व्यवस्थाएं की गईं। हालांकि वित्तीय योजनाओं पर कुछ सजग राज्यों ने अमल किया है और वे अपने मौजूदा अस्पताल नेटवर्कों के माध्यम से स्वास्थ्यसेवा संबंधी कार्यक्रमों को लागू कर रहे हैं।
बुजुर्गों की देखभाल, मेडिकल की औपचारिक स्कूली शिक्षा में शामिल नहीं है, और इसे मुख्यधारा में शामिल किए जाने की कोई संभावना भी हमारे यहां नहीं दिखती। बुजुर्गों की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें, सामान्य स्वास्थ्य ज़रूरतों से काफी अलग होती हैं, और यह ज़रूरी है कि हम विशेष देखभाल द्वारा उनका समाधान करें।
हम इस बारे में क्या कर रहे हैं?
भारत में 20% से अधिक बुजुर्गों को दुर्व्यवहार और बेसहारा छोड़ दिए जाने का शाप झेलना पड़ता है। दुर्व्यवहार के अनेक रूप हैं-भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक। आजकल 40 से 50 साल आयु वाले ज्यादातर लोग [उनके बुजुर्गों को सर्वाधिक देखभाल की आवश्यकता है और वे 65 से 75 साल वाली आयु श्रेणी में आते हैं]या तो किन्हीं पश्चिमी देशों में पैसा कमा रहे हैं या टियर 1 शहरों में सुखपूर्वक रह रहे हैं, जबकि उनके अभिभावक अपने गांवों या मूल शहरों में रहने को मज़बूर हैं, जहां उन्हें कोई सहारा देने वाला नहीं है।
बहुत से बच्चे, अपने 'बुजुर्गों' को ओल्ड ऐज होम (वृद्धाश्रम) में किसी बेकार वस्तु की तरह छोड़कर उनसे छुटकारा पाते भी देखे जाते हैं। ओल्ड ऐज होम भी सभी आकार-प्रकार वाले होते हैं। ज्यादा महंगे केवल ज्यादा पैसे वालों के लिए हैं, क्योंकि सभी उन्हें अफोर्ड नहीं कर सकते। छोटे या सस्ते वालों में भीड़ ज्यादा रहती है, जहां प्रतीक्षा का समय ज़रूरतमंद बुजुर्ग की जीवन प्रत्याशा से भी अधिक हो सकता है।
सेवानिवृत्त समुदाय तीसरा विकल्प है, जो बुजुर्गों के लिए घर और सभी ज़रूरी सुविधाएं जुटाने के व्यापारिक उद्देश्य से कार्य करता है। अच्छे होने के बावजूद इस तरह के घर भी खरीदने और रहने के लिहाज से काफी महंगे होते हैं। और उनमें किसी भी वर्ग के बुजुर्ग रहें, यह सवाल अपनी जगह कायम रहता है कि क्या वे वहां खुश हैं, क्या वे अपने-आप अपना उचित जीवनयापन करते रह सकते हैं।
आर्थिक विकास, परिस्थितियाँ और जीवनशैली में परिवर्तन इस प्रकार जानबूझकर/अनिच्छा पूर्वक त्याग देने की वजहें हो सकती हैं, हालांकि हमें अधिक ध्यान देकर व परवाह करते हुए, परिवार के बुजुर्गों की देखभाल की समस्या हल करनी होगी।
Poonam क्यों?
इस गहरी समझ के साथ, कि बुजुर्गों के लिए केवल शारीरिक देखभाल के बजाय उनका मानसिक स्वास्थ्य अधिक महत्त्वपूर्ण है, और अकेलापन, बुजुर्गों की समस्याओं का बुनियादी कारण है, हमने एक सोशल शार्ट - Poonam के रूप में इस समस्या के समाधान का प्रयास किया है।
Poonam मेलजोल के माध्यम से अकेलेपन का सामना करने के बारे में है, और यह मेलजोल, बुजुर्गों की कई समस्याएं हल कर सकता है, जिनमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और लंबी आयु भी शामिल है।
निर्माता Ms. Shilpi Das Chohan ने बताया कि, "बुजुर्गों की देखभाल, सामाजिक जिम्मेदारी के बजाय एक आकर्षक बाज़ार बन गई है। बुजुर्गों की देखभाल, ऐसा सामाजिक मसला है जिसकी सबसे ज्यादा अनदेखी की जाती है। यह हम सबके साथ होना है। उन्हें दर्द और पीड़ाओं, अनिद्रा, याददाश्त की कमजोरी, अकेलेपन आदि का सामना करना पड़ता है। और शारीरिक क्षमताएं कम होने के साथ वित्तीय असुरक्षाएं और दुर्व्यवहार की समस्याएं भी बढ़ती जाती हैं। हमने इस बारे में वैश्विक स्तर पर व्यापक दर्शक वर्ग को एक संदेश देने, भावनाएं जगाने और कदम उठाने हेतु प्रोत्साहित करने की ज़रूरत महसूस की है। हमने विजुअल स्टोरीटेलिंग का उपाय चुना और इसे इस फिल्म – Poonam के माध्यम से पेश किया है। हम चाहते हैं कि हर उम्र के दर्शक इसे देखें और विचार करें और अपनी जिम्मेदारियां स्वीकार करें।"
एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, Anil Kumar P, ने कहा कि, "Poonam एक कोशिश है जो कि रोगों और समय से पहले मौतों की आशंकाएं काफी बढ़ा सकने वाली एक खामोश बीमारी-'अकेलेपन' के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए है।"
बुजुर्ग कभी शिकायत नहीं करते और बच्चे कभी समझ नहीं पाते। आखिरकार पूरी स्थिति तर्कसंगत लगती है, लेकिन अगर ऐसा है, तो किस सीमा तक?
मीडिया संपर्क :
Shilpi Das Chohan
[email protected]
+91-9902077066
संस्थापक
Shilpi's Voice & Visuals
फोटो: https://mma.prnewswire.com/media/1358570/Social_Short_Poonam.jpg
लोगो: https://mma.prnewswire.com/media/1228063/Shilpi_Voice_and_Visuals_Logo.jpg
लोगो: https://mma.prnewswire.com/media/1228061/Epicreel.jpg
वीडियो: https://www.youtube.com/watch?v=2OOYQztkca4
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